Monday, September 19, 2011

ज़िन्दगी

यूँ खुल के मुस्कुराके हर किसी से गम छुपाना ज़िन्दगी है,
कभी खुद के तो कभी दूसरों के काम आना ज़िन्दगी है,

मैं खुद को ढूंढता रहता था न जाने किन बिलों में,
बड़ी मुद्दत में जाना तुझ में मेरी ज़िन्दगी है.

मैं जब भी उसको अपनी ज़िन्दगी में खोजता हूँ,
यूँ लगता है के जैसे हर फ़साना ज़िन्दगी है.

यूँ दरिया को समंदर होने में अभी कुछ वक़्त बाकि है,
न जाने कब वो जानेगा रवानी ज़िन्दगी है.

ये मुमकिन है की कुछ लम्हों में कुछ न रह जाए,
हाँ जब तक है वो बाकि तब तलक ही ज़िन्दगी है.